खजांची(लघुश्रेष्ठी)- सच्चियाय माता
खाबिया- केलपूज्य माता
कुलदेवियो पर किताब जो मूल रूप से छत्तीसगढ़ के लिए मेरे द्वारा लिखी गई थी, जब प्रदेश की सीमाओं के बाहर किताब के चले जाने के बाद यह महसूस हुआ कि ऐसी कोई व्यवस्था हो जिससे लगभग अधिकतम जैन गोत्र संकलित हो जाए और समय समय पर संशोधन संभव हो सके, यह ब्लाग द्वारा ही संभव लगा,सच्ची घटनाओंके लिए के लिए देखे-renikjain@blog.spot.com, My email for correction,Feedback,addition is- renikbafna@gmail.com, Whatsapp- 94063-00401(मेरी किताब खरीदने के लिए वाट्सएप नं 94063 -00401 पर ही संपर्क करे )
Sunday, 19 July 2020
ध अक्षर से
धाड़ीवाल(पट्टन)- सच्चियाय माता
धाड़ीवाल- करणी माता (सही स्थिति जानने के लिए
इतिहास देखे और कुलगुरु से संपर्क करे)
प अक्षर से
पंसारी- सच्चियाय माता
पगारिया- खीमच माता
पहाड़िया- आशापुरा देवी
पटवा(बाफना)- सच्चियाय माता
पटवा(श्रेष्ठी)- सच्चियाय माता
पटवा(कन्नैजिया)- सच्चियाय माता
पटवा(लघुश्रेष्ठी)- सच्चियाय माता
पटवा(धाड़ीवाल)- सच्चियाय माता
पटवा(मोहीपुर))- अधरदेवी
पारख- सच्चियाय माता
पारख- बाकलमाता(ग्राम-चौटे, बाड़मेर)(द्वितीय मत)
पारख(अनबिंद)- सच्चियाय माता
पारख(बालेसर)- बाड़मेर की देवी
पारख(लोहावट,अनबिंद)- खेतपाल जी(लोहावट),
हालांकि ये गलत लगता है,क्योकि कोई न कोई
देवी ही कुल देवी होगी)
पारख(आदित्यनाग)- नागणेशी माता
पारख(डागा)- आशापुरा देवी
पोकरणा- सच्चियाय माता
पुगलिया- लोदरमाता
पींचा(मुणोत)- बाप ग्राम की देवी
पींचा- नागणेशी माता
भ अक्षर से
भड़गतिया-सच्चियाय माता
भद्रा-सच्चियाय माता
भंडारी(दीदु)-सच्चियाय माता
भंडारी(नाडोल)- आशापुरा माता (नाडोल)
भंसाली-लोदरमाता(प्रथम मत)
भंसाली(कच्छवा)- लोदरमाता
भंसाली(चिलमेहता)-लोदरमाता
भंसाली( सोलंकी)- लोदरमाता
भंसाली(चुगलिया)- लोदरमाता
भूरा(श्रेष्ठी)-सच्चियाय माता
भूरा(भंसाली)-लोदरमाता
भूरा(मूल गोत्र)- सच्चियाय माता
Wednesday, 16 October 2019
Friday, 3 November 2017
मेरी जैन समाज के कुलदेवियों पर लिखी किताब अब उपलब्ध नही
जनसेवा मैने बन्द कर दी है कृपया मुफ्तखोर संपर्क न करे। किताबे खत्म हो चुकी करीब2,
अब अपनी कुलदेवी खुद खोजे राजस्थान घूम2कर। मेरी किताबे करीब2 खत्म हो चुकी है
अपने धर्म गुरु से पूछे या कुल गुरु से पूछे
मुफ्त जन सेवा या समाजसेवा मैने बन्द कर दिया है कृपया मुफ्तखोर संपर्क न करे
समाज सेवा से न पुण्य होता है न पाप फिर क्या फायदा!
Wednesday, 12 July 2017
कुलदेवी पूजा क्यो करनी चाहिए
विचारणीय विषय किसीने प्रस्तुत किया है (मूल रूप से यह लेख किन्हीं दूसरे सज्जन का है, उपयोगी होने के कारण जन-कल्याण हेतु यहां दिया जा रहा है) -
समय क्रम में परिवारों के एक दुसरे स्थानों पर स्थानांतरित होने ,धर्म परिवर्तन करने ,आक्रान्ताओं के भय से विस्थापित होने ,जानकार व्यक्ति के असमय मृत होने ,संस्कारों के क्षय होने ,विजातीयता पनपने ,इनके पीछे के कारण को न समझ पाने आदि के कारण बहुत से परिवार अपने कुल देवता /देवी को भूल गए अथवा उन्हें मालूम ही नहीं रहा की उनके कुल देवता /देवी कौन हैं या किस प्रकार उनकी पूजा की जाती है। इनमे पीढ़ियों से शहरों में रहने वाले परिवार अधिक हैं, कुछ स्वयंभू आधुनिक मानने वाले और हर बात में वैज्ञानिकता खोजने वालों ने भी अपने ज्ञान के गर्व में अथवा अपनी वर्त्तमान अच्छी स्थिति के गर्व में इन्हें छोड़ दिया या इनपर ध्यान नहीं दिया।
कुल देवता /देवी की पूजा छोड़ने के बाद कुछ वर्षों तक तो कोई ख़ास अंतर नहीं समझ में आता ,किन्तु उसके बाद जब सुरक्षा चक्र हटता है तो परिवार में दुर्घटनाओं ,नकारात्मक ऊर्जा ,वायव्य बाधाओं का बेरोक-टोक प्रवेश शुरू हो जाता है ,उन्नति रुकने लगती है ,पीढ़िया अपेक्षित उन्नति नहीं कर पाती ,संस्कारों का क्षय ,नैतिक पतन ,कलह, उपद्रव ,अशांति शुरू हो जाती हैं। व्यक्ति कारण खोजने का प्रयास करता है। कारण जल्दी नहीं पता चलता क्योकि व्यक्ति की ग्रह स्थितियों से इनका बहुत मतलब नहीं होता है।अतः ज्योतिष आदि से इन्हें समझना मुश्किल होता है। भाग्य कुछ कहता है और व्यक्ति के साथ कुछ और घटता है।